शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011
रविवार, 27 मार्च 2011
टिप्पणियों को टिकाइए जी .......इन्हें अलग से पाईए जी ...झा जी की बकबक
![]() |
| सिर्फ़ पोस्ट पर ही नहीं टिप्पणियों के लिए भी चले उंगलियां |
हिंदी में जितना लेखन किया जा रहा है ..मतलब कि पोस्ट लेखन ..ऐसा हो सकता है कि उससे कहीं अधिक पठन किया जा रहा हो ..मगर यकीनन यहां बाहर से आए कई पाठकों को कई बहुत ही बेहतरीन पोस्टों पर पहुंचने पर जब एक भी टिप्पणी नहीं दिखाई देती तो वो ठिठक कर ये जरूर सोचता होगा कि आखिर इतने छोटे से हिंदी ब्लॉग जगत में भी जब ऐसी पोस्टों पर टिप्पणी नहीं है तो फ़िर इनके पाठक कहां हैं ? क्या ऐसी कुछ किया जा सकता है कि इन टिप्पणियों को ही एक जगह पर सहेजा जा सके ताकि उससे न सिर्फ़ उस पोस्ट बल्कि टिप्पणी का भी एक अलग वजूद बन जाए और शायद ऐसा करके बहुत से साथी ब्लॉगर्स को टिप्पणी करने के लिए प्रेरित किया जा सके ।
आज रविवार को यही बातें तब मेरे दिमाग में घूमती रहीं जब मैं पोस्टों को पढने के क्रम में इधर उधर टहल रहा था । मुझे लगता है कि हम इसलिए लिखते हैं क्योंकि अपने विचार बांट सकें और एक पोस्ट लेखक को यदि उस पर कोई प्रतिक्रिया ही नहीं मिलेगी तो न सिर्फ़ उस पोस्ट पर पहुंचने से ऐसा लगेगा जैसे आप किसी दीवार पर पहुंचे और वहां चस्पाई गई चीज़ पढ कर चुपचाप निकल गए हों । हां मैं मानता हूं कि न तो पोस्टें टिप्पणियों के लिए लिखी जाती हैं न ही हर पोस्ट पर प्रतिक्रिया की ही जाए ये जरूरी है , और इसके बावजूद कि शायद पोस्ट लेखक को उस लेख पर कोई प्रतिक्रिया अपेक्षित नहीं है ( हालांकि मुझे अब तक ऐसा कोई अपवाद मिला नहीं है , नहीं मैं नहीं मानता कि जिन्होंने टिप्पणी बक्सों को ताला लगा रखा है उन्हें किसी प्रतिक्रिया की दरकार नहीं है ) , लेकिब बाद में और बहुत बाद में आए पाठकों के मन बिना टिप्पणी वाली पोस्टों पर एक कौतूहल ये बना ही रह जाता है कि , आखिर इस पोस्ट को पढके क्या सोचा गया होगा । या शायद किसी ने इस पोस्ट को पढा ही नहीं ।
मैं ये सोच रहा हूं कि क्या ये संभव है कि हिंदी ब्लॉग पोस्टों पर की जा रही टिप्पणियों को एक मंच पर सहेज के रखा जा सके । विशुद्ध रूप से टिप्पणियों का एग्रीगेटर । हां मैं जानता हूं आप सोच रहे होंगे कि एक तो पहले से ही पोस्टों के लिए एक एग्रीगेटर के लाले पडे हुए हैं ऊपर से मैं टिप्पणियों के लिए एक अलग एग्रीगेटर की बात घुसेड रहा हूं । जी घुसेड ही नहीं दी है बल्कि ब्लॉगिंग महामानव ......ब्लॉग जिन्न ..श्री श्री बी एस पाबला जी के इस नायाब मंच ..ब्लॉग मंच पर प्रश्न उछाल चुका हूं ...और इसका हल न निकले ..ऐसा हो ही नहीं सकता । ये तो बस बकबक थी जी ..क्या पता आगे आपके कौन सी काम आ जाए .....नहीं तो हम तो झाजी हैं ही ..बकबक वाले
बस आप लोग भी अब शुरू हो जाईये ..लीजीए ..एग्रीगेटर के लिए टिप्पणियां ही तो चाहिए न जी ..आयं
लेबल:
टिप्पणियां,
टिप्पणियों के लिए अलग मंच,
बकबक,
बहस,
विमर्श
गुरुवार, 9 दिसंबर 2010
खबरदार ! अब सब ठीक है , चिट्ठाजगत में ...तो बामुलाहिजा ..होसियार खबरदार ..धडाधड महाराज लौट आए हैं ...
लीजीए तो आखिरकार धडाधड महाराज हमारे बीच आ ही गए ....अजी पूछिए मत ...नाक में दम हो गया था महाराज । लाख उपाय किए , और जाने कौन कौन से कितने जतन कर डाले कि ..बस अब तो धडाधड महाराज जब हमे बिना बताए ही अचानक धडाम हो लिए ..तो जरूर सीता जी की दुविधा ने उन्हें फ़िर घेर लिया होगा और उनकी दुविधा दूर करते करते हमारा एक और एग्रीगेटर ..वो भी धुरंधर जी महाराज ..लोट लिए और सरक लिए । अब तो मेरा कंप्यूटर भी ताने मारने लगा था ..और भईया झाजी ..मिजाज हरियायल बा न ? अरे का काहे के लिए हरेक मिनट उसका चकरी घुमा घुमा के रिफ़्रेश कर रहे हैं । अब तो दू तीन दिन का सीएल मार लिया समझिए । और कहिए कि चिट्ठाजगत बीमार है ..बीमार है ।हम भडक गए और फ़ौरन कंप्यूटर की गर्दन धर ली ...अबे चुप्प बे , कौन हमीं ने कहा था बे ..हमने तो कुछ भी कब्बो नहीं कहा बल्कि टीप टीप के धडाधड महाराज का ही पक्ष लिए थे अरे सच कह रहे हैं भाई । देखो देखो यार अब कुछ सूची में गडबड था तो था ....राम राम राम राम फ़िर वही बात । अरे हम नहीं कह रहे हैं जी , बल्कि हम तो कह दिए हैं ..खबरदार ! अब सब ठीक है ..अरे जो भी है ठीक है भाई ...ए सुनिए यार , ई काऊंट डाऊन , इ लिंक , थिंक वाल चक्कर सब ....और जौन टाईप का भी उत्तेजना होता है आप लोग के ..यार तनिक उसको डायवर्ट करके रखिए न जी , अरे माने तो चिंता जाहिर करते रहिए ...मगर भीतरे भीतर । अरे कम से कम पोस्ट पढने लिखने का औप्शन तो रहने ही दिया जाए जी ।देखिए हम जान रहे हैं कि इससे आप लोग को कुछ पोस्ट जो ड्राफ़्ट में रखे हुए हैं अब उसको छापने का स्कोप थोडा सा कम टाईप का हो गया है , लेकिन यार इत्ता सैक्रीफ़ाईस आप नहीं कर सकते हैं क्या । अरे कर सकते हैं महाराज ..तो नाक बंद करके गहरी सांस लीजीए और एक साथ कसम खाईए कि अब धडाधड महाराज को कोई नहीं कुरियाएगा ( मतलब कि खुजली करेगा ) , और न ही कोई सूची , (यहां तक कि आंग सान सूची जैसी कोई पोस्ट भी आ जाए तो उसे इग्नोर कर देगा ), अरे कसम के बाद अईसा बादाखिलाफ़ी आप नहीं कर सकते हैं ,कोई रैंक , चाहे कि कल होके आपको स्वयं महाराज दन्न से कंप्यूटर से निकल कर कहें कि आपके ब्लॉग को कर्नल का रैंक से नवाजा गया है , कल से लिखा आएगा ..कर्नल __________, मेजर _________, हवलदार ________, आदि आदि ।तो बस आज की बकबकाहट यहीं समाप्त होती है ...अब चलते हैं जरा महाराज संग घूमने ..ये पोस्ट निर्मल हास्य ( एक तो ये दोनों ससुरे आज तम हमें नहीं मिले हैं , किसी भी ब्लॉग बैठकी में ) के लिए लिखी गई है ..बांकी आप लोग को भी कुछ मिलता है तो समेटे जाईये , कौन मनाही नहीं है जी
मंगलवार, 30 नवंबर 2010
आज की कुछ खासमखास बकबक ....अरे नहीं बकर बकर कहिए
हमारा आज का फ़ेसबुक स्टेटस :-
DDA के फ़्लैट्स के लिए आवेदन पत्र की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है ...सुना है कि इस बार का सिलेबस बहुत अलग कर दिया है ..पच्चीस पेज के उस बुकलेट को समझने के लिए ..हमने पच्चीस दिन का क्रैश कोर्स ट्यूसन ..शुरू किया है ..on.first come bais....जल्दी करें ..
________________________________________________________________________
आज के विचार कुछ ये हैं जो दिमाग में आए हैं कि अब तक जो थोडा बहुत बिग बॉस झेला है ..या कहिए कि जबरन ही घरवालों द्वारा खाना खाते समय झिलवाया गया है ..उसके हिसाब से ..वहां रह रहे तमाम प्रतियोगियों में हमें तो ...एक ही प्रतियोगी दिखा जो ..शिक्षित , संस्कारी , सहनशील , सहिष्णु ..या कुल मिला कर ..एक अच्छा इंसान दिखा ......वो हैं सीमा परिहार ..पता चला कि वे डाकू थीं ...लो उनको छोड कर अन्य सभी में हमें थोडा बहुत डाकूपन दिखाई दिया ...
______________________________________________________________________________
अब आज की पढाई लिखाई :-
मा स्साब अपने एक स्टूडेंट से , तुम बडे होकर क्या बनोगे ....
स्टूडेंट :-सर , MBBS करने के बाद मैं पुलिस ज्वाइन करनी सोच रहा हूं , और एक software company में एक अच्छी सी जॉब भी करूंगा एक legal advisor के रूप में , ब्ल्डिंगें बनाऊंगा और रिसर्च करते हुए एक्टर बनने का प्रयास करूंगा ..
मा स्साब ...तेरा नाम क्या है बे ....
स्टूडेंट .....रजनीकांत ...
चलिए अब इतना ही ..अब बकबक ही करेंगे तो लिखेंगे पढेंगे कब जी ..आयं
शुक्रवार, 26 नवंबर 2010
.दिसंबर में फ़िर से एक ब्लॉग बैठक करने वाले हो ................जी , हां ...शायद ....................यार बाई गॉड पूरे उल्लू के
अभी थोडी देर पहले ही फ़ेसबुक पर स्टेटस अपडेट किया ...येएक फ़ोन आया ... सुना है कि आप लोग ...दिसंबर में फ़िर से एक ब्लॉग बैठक करने वाले हो ................जी , हां ...शायद ....................यार बाई गॉड पूरे उल्लू के ..........हो....फ़ोन कट
हमारे एक दोस फ़ौरन हमें काल करके बोले ...सारा रोमन बाला उन्हीं का है , और अंग्रेजी में लिखा हुआ अजय हम ही हैं ..माने झाजी ..देखिएLakshmi ne phone kiya tha kya?
ajay: हां लक्षमी जी खुद थी लाईन पर
: ha ha ha
kya Swari ganthane ke unka irada hai?
ajay: पता नहीं अभी कंफ़र्म तो नहीं हुआ है उनका मकसद मगर उन्होंने मुझे प्रोपरली पहचान लिया ये कम बडी बात नहीं रही
: arthat mamala ulata hai... swarth aapaka hai .... ha ha ha
ajay: जी मगर बातों से ऐसा लग रहा था कि लक्षमी जी जरूर एक बीमा पॉलिसी पर साईन ले कर जाएंगी ...घोर स्वार्थी टाईप से
yadi ve svayam aati hai to policy me koi burai to nahee ?
ajay: अजी क्या पता बाद की किस्तों के लिए यमराज से दूत अपाईंट कर रखे हों
: arey kya baat kar di aapane?
ajay: वैसे लक्षमी ने ऐसे कोई एक्सप्रेसन दिए तो नहीं थे
इसलिए एक ब्लाईंड गेस था
वैसे भी मैंने सोचा कि लक्षमी जी अपने उल्लू के सामने सलेक्टेड एक्सप्रैशन ही देती होंगी
अभी अभी चैटिया रहा था एक दोस
बुधवार, 24 नवंबर 2010
आईए हिंदी ब्लॉगिंग के रसातल को देख कर आते हैं ................
जी हां चौंकिए मत , दरअसल पिछले दो दिनों की कुछ पोस्टों ने , मेरे उन दो प्रिय ब्लॉग शिक्षार्थियों , एक है सुश्री रिया नागपाल और दूसरे हैं मित्र ब्लॉगर और इस बार ही मिले भाई केवल राम , ये दोनों वो लोग हैं जिन्होंने हिंदी ब्लॉगिंग को शोध का विषय बनाया है, उन्हें थोडा सा क्षुब्ध सा कर डाला होगा सो उन्हीं से मुखातिब हूं । अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि इसे ब्लॉगजगत की खुशकिस्मती कहूं कि पिछले दस दिनों में ही हिंदी ब्लॉगिंग पर एक अलग दृष्टिकोण बनाने और स्थापित करने वाले दो लोग अचानक ही रूबरू हुए , या फ़िर ये ब्लॉगजगत की बदकिस्मती कहूं कि दोनों ने ही पिछले दस दिनों में जो पोस्टें , और बहस देखी हैं तो उन्हें कैसा महसूस हुआ होगा । बनिस्पति इसके कि , हिंदी ब्लॉगिंग में इससे भी अधिक , निंदनीय , शर्मनाक , विवादास्पद हो चुका है इनका भी होना अब अनछुआ तो नहीं ही रहेगा ,और जिस तरह की पोस्टें और प्रतिक्रियाएं मैंने पढी देखी तो जरूरी हो गया कि ..एक ब्लॉगर मन को अब छोड दिया जाए कि ..चल कर कुछ ....बेबाक बकबक ॥इन पोस्टों से , इनमें आई टिप्पणियों से , और उनमें से निकले उदगारों ने निश्चित रूप से ब्लॉग्गिंग और ब्लॉगर्स को सीखने के लिए बहुत कुछ दिया होगा , जिसमें से पहला तो वही है जो इस दुनिया के परे भी चलता है ...यानि इतिहास अपने आपको दोहराता है ..और दोहराता ही जाता है ....यानि आप जो कुछ करेंगे , कहेंगे , सुनेंगे ..वो घूम फ़िर कर आपके सामने ठीक उसी रूप में खडा हो जाता है ..ज्यादा से ज्यादा अप उसे थोडे दिनों के टाल सकते हैं ।एक दूसरी महत्वपूर्ण बात ये कि हिंदी ब्लॉगिंग में जब भी किसी बैठक / सम्मेलन और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा तो यकीनन , उसकी सफ़लता उसकी सार्थकता से ज्यादा रुचि उससे संबंधित कोई विवाद , कोई बवाल आदि पर ही बनेगी । वाह वाह इसे क्या कहा जाए विडंबना मात्र या कि हिंदी ब्लॉगिंग की मासूमियत कि इतना भी परिपक्व नहीं कि अपनी एक किसी छवि को ही बचा सके । एक और बात ये कि , चाहे हिंदी ब्लॉगर्स लाख प्रयास करें मगर अक्सर क्रिकेट मैच के उस एकमात्र कैच को छोड देने की गलती जरूर करते हैं जो बात में हार का सबब बन जाता है ।मैं अपने दूसरे ब्लॉग पर रविवार के रोहतक ब्लॉगर बैठक की रिपोर्ट करीने से सजाने में लगा था , हालांकि सबका मानना है कि इस तरह के ब्लॉग बैठकों में कुछ नहीं होता किंतु यदि किसी ब्लॉगर से उसके मुंह से ये सुनना कंप्यूटर के संचालन में भूलवश हुई एक गलती ने उन्हें नौकरी खोने पर मजबूर किया और उसके बाद उन्होंने न सिर्फ़ कंप्यूटर सीखा बल्कि एक दिन ब्लॉगिंग में भी आ गए , तो मेरे लिए तो एक ब्लॉगर के मुंह से सुना हुआ उनका ऐसा अनुभव भी मेरे लिए वहां मेरी उपस्थिति को सार्थक कर गया , । तो जैसा कि मैं कह रहा था कि मैं रिपोर्ट सजाने में लगा हुआ था , बावजूद इसके कि कुछ दिनों से लगातार ब्लॉगजगत से जुडे साथियों के लिए मुश्किल समय गुजर रहे होने के कारण मन मेरा बोझिल था , मैं चाह रहा था कि जल्दी से जल्दी सब तक सारा कुछ पहुंचा दूं , मगर अचानक देखा तो दो पोस्टों पर नज़र गई । दूसरी पोस्ट पहली पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा , एक विशेष शब्द के प्रयोग और लेखक की मंशा और यहां तक कि उस पर पाठकों द्वारा दी गई टिप्पणियों पर सख्त एतराज़ जताते हुए लिखी गई थी । अब बात इसके आगे की ....पहली बात तो मैं ये स्पष्ट कर दूं , कि,हालांकि इस बैठक का आयोजक मैं नहीं था इसलिए ये स्पष्टीकरण करने देने का हक सिर्फ़ राज भाटिया जी का ही है ,मगर चूंकि एक ब्लॉगर की हैसियत से मैं भी वहां उपस्थित था इसलिए कम से कम अपनी स्थिति स्पष्ट कर दूं इतना हक तो है ही मुझे । तो सबसे पहली बात उनके लिए जो इस पोस्ट को ब्लॉगर्स बैठक से जोड कर देख रहे हैं या जोडने की कोशिश कर रहे हैं जैसा कि उस पोस्ट की शीर्षक से ही स्पष्ट था ...ब्लॉगर बैठक के बाद .......जी हां ध्यान दीजीए ..के बाद । यानि तब जबकि बैठक खत्म हो चुकी थी और ये बैठक तभी खत्म हो चुकी थी जब हम सब आपसी विमर्श और बातचीत के बाद उठ कर तिलियार बाग के भ्रमण पर निकल गए थे और फ़िर तो पोस्ट में जिस एक बात या रात सुबह का जिक्र था उस वक्त तक तो इतिहास ने तारीख भी बदल ली थी ...। जो लोग इसे ब्लॉग बैठकों में होया किया साबित कर रहे हैं वे जरा फ़िर ये भी बता देते कि ब्लॉग बैठक के बाद भाई समान ब्लॉगर डॉ टी एस दराल जी के यहां उनके पितृशोक पर हमारा जाना भी किस साजिश के तहत किया गया है ...हद है सोचने और कहने वालों की । तो खैर इससे निषकर्ष ये निकलता है ब्लॉगर बैठक के आयोजन करने वाले तमाम उन विचारों को अपना गला ये सोच कर घोंट लेना चाहिए कि यहां दूसरे तो दूसरे उन मित्रों ने भी इसे खाने पिलाने की हैसियत करने वाले किसी भी शख्स की बपौती करार दिया जिन्होंने तो सरकारी खजाने से ही ऐसी या शायद इससे भी उच्च कोटि की मेहमाननवाजी का आनंद हिंदी ब्लॉगर होने की वजह से ही उठाया था , काश कि तब भी सोचा होता कि , बिल तो वहां भी दिया ही गया होगा ...एक की जेब से न सही .....पूरी जनता की जेब से ही सही । अब देखना तो ये है कि ऐसी घटनाएं मेरे जैसे उन और कितने सिरफ़िरे ब्लॉगर को कितने हद तक तोड पाती है कि कभी तो कुछ ऐसा होगा कि ..हम सोच बैठेंकि ..हां ये दुनिया आभासी ही रहे तो ठीक है ...मैं इस संदर्भ में एक उस बात का जिक्र करना चाहता हूं जो कि संयोग से ही इस बैठक में भाग लेने जाते समय हमारे बीच हुई थी । मुझे पता नहीं कि मैंने किस संदर्भ में ये बात कही थी मगर मैंने कहा था कि , ये बहुत ही जरूरी है कि पोस्ट को जिस भावना और मंतव्य से लिखा गया है उसे पाठक उसी मंतव्य से समझे भी , ये हो सकता है शत प्रतिशत वैसा हो पाना संभव न हो मगर तालमेल तो होना ही चाहिए , अन्यथा बहुत बार पोस्ट में कही गई और उससे समझी गई बातों में गजब का विरोधाभास हो जाता है । एक दूसरी जरूरी बात ये कि कभी कभी सिर्फ़ एक टिप्पणी पूरी पोस्ट की दिशा मोड देती है या कहिए कि भटका देती है उसे उसके उद्देश्य से । अब इसी संदर्भ में पहली पोस्ट आ घेरे में आ गई । हालांकि कुछ भी लिखने पढने सुनने से पहले ये बात ध्यान में रखनी ही होगी कि , क्या सिर्फ़ एक पोस्ट , एक कमेंट , के आधार पर किसी ब्लॉगर की छवि उसके विचार उसके उद्देशय को तय कर देना उचित है , हालांकि मैं किसी की तरफ़ से कोई स्पष्टीकरण नहीं दे रहा क्योंकि समय के अनुकूल प्रतिकूल लिखने पढने की स्वाभाविक जिम्मेदारी के एहसास की अपेक्षा तो यहां हर किसी से ही होती है । तो फ़िर क्या अक्सर उनकी पोस्टों में उनकी टिप्पणियों में उनके विचार , उनका मंतव्य वही होता है जो कि उस पोस्ट के आधार पर बनाया दिखाया समझाया जा रहा है । हां भूल तो हुई है , और इसके जस्टीफ़िकेशन की कोई कोशिश करने का प्रयास भी किए जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि जब ये अंदेशा हो गया था कि पोस्ट को एक गलत दिशा दी जा रही है तो फ़िर उन कारकों (टिप्पणियों) को सिरे से ही मिटा देना चाहिए था और हो सकता तो पोस्ट भी । और उस पोस्ट से बेहतर विकल्प तलाशाना कोई कठिन कार्य नहीं था कम से कम उनके लिए तो जरूर ही ।अब बात दूसरे पोस्ट की , ये तो बिल्कुल स्वाभाविक ही था कि जिन्होंने महिला अधिकारों पर किसी भी तरह से कभी भी किसी को नहीं बख्शा तो फ़िर कैसे ये मान लिया गया कि इस पोस्ट को वे यूं ही जाने देंगी । हालांकि मैं इस समय ये बात कतई नहीं कहना चाहता था , मगर इतना तो सबको यहां स्पष्ट दिख जाता है कि अपने एक विशेष बागी तेवरों और विचारों के कारण ही जाने अनजाने वे अन्य सभी ब्लॉगर्स से वैचारिक उलझाव में रही जरूर हैं । और ऐसा करते हुए खुद उन्होंने भी कई बार शायद उन मर्यादाओं को पार किया हो जिन्हें अक्सर नैतिकता के पैमाने पर रख कर देखा जाता है , मगर हर बार अपनी लडाई पूरी दृढता से लडी है । मगर लडी ही हैं , कभी कोई मुद्दा या बहस उन्होंने इसके विकल्प से नहीं हासिल किया ..यही उनका मुद्दा है । आखिर क्यों कभी कोई दूसरा ऐसा नहीं दिखता लिखता जो कि अन्य सभी ब्लॉगर्स के समान रूप से निशाने पर आ जाता हो । और तभी तो कहा गया है न कि इतिहास खुद को ही दोहराता है ...मेरे ख्याल से अब ये बात भी गौर करने लायक है कि आखिर हर बार वही क्यों ...और यदि मिल जाए तो फ़िर ...उत्तर तो अगला प्रश्न होना चाहिए कि .....तो फ़िर हर बार यही क्यों (पोस्ट ).....।मुझे लगता है कि हमें एक दूसरे की इज्जत करना अभी सीखना होगा और यदि ऐसा हम नहीं कर पा रहे हैं तो फ़िर ये बहुत ही जरूरी हो जाता है कि हम आपस में आभासी रिश्ता ही निभाएं ताकि कम से कम ये अपेक्षा और अफ़सोस भी न रहे कि जिनके लिए ऐसा सोचा वो तो वैसे निकले या फ़िर कि ओह इनके लिए क्यों ऐसा सोचा ये तो वैसे न निकले । अब इन सब पिछली कुछ घटनाओं से सीखते हुए मुझे लगता है कि दो निर्णय लेना श्रेयस्कर होगा , पहला ये कि अब तक बनने हुए रिश्तों को ही जबरदस्ती ही सही आभासी जामा पहना दिया जाए और दूसरा ये कि भविष्य की तमाम ऐसी बैठकों , विमर्शों , का आयोजन करने वाले सभी मित्रों को चुन चुन कर ये लिंक्स भेजा करूंगा । फ़िलहाल तो इतना ही ..तो रिया और केवल जी से यही आग्रह है कि ..जब ब्लॉगिंग का इतिहास लिखने का प्रयास करें तो इन मुद्दों पोस्टों पर कोई दृष्टिकोण बनाने से पहले सब कुछ अच्छी तरह से खंगाल लें ।
एक आखिरी बात ये कि मैं इस पोस्ट की हालत देखने के बाद ही तय करूंगा कि ये पोस्ट रहनी चाहिए या नहीं ..क्योंकि कूडा करकट बन गई तो रखने का क्या फ़ायदा .....
मंगलवार, 16 नवंबर 2010
सभी महिला ब्लॉगर्स से एक शिकायत हमारी भी ...आज तो सुननी पडेगी जी ...



जी हां मुझे अच्छी तरह से पता है कि मेरे इस शीर्षक को पढ कर आप सब महिला ब्रिगेड ने भौंहें तानी होंगी और पहले सोचा होगा अच्छा अच्छा अब कौन है ये दु:साहस करने वाला ..देखें तो ज़रा ...और ये किया क्लिक ..भई यूं तो ये शिकायत मुझे काफ़ी पहले से ही थी फ़िर सोचा आज तो कह ही दूं ताकि समय रहते मेरी शिकायत की सुनवाई हो सके तो क्या पता भविष्य में ये शिकायत दूर ही हो जाए ।तो मेरी शिकायत ये है कि इतने सारे ब्लॉगर सम्मेलन , संगोष्ठी ,मिलन आदि का संयोग बनता रहता है , और हमारे हर मोर्चे , हर पोस्ट , हर टिप्प्णी , हर सहयोग और हमारी हर वैचारिक लडाई में हमारे कदम से कदम मिलाती हमारी सहब्लॉगर इनमें बहुत ही नाममात्र की भागीदारी करती हैं । ये बात बहुत ही खलती है कि , महिला मुद्दों पर एक बटालियन बन कर और ताबडतोड फ़ायरिंग करके सबको मुंहतोड जवाब देने वाली ये ब्लॉगर ऐसे मंच पर अपने अनुभवों को , अपनी कठिनाईयों को और अपनी उपलब्धियों को साझा करने से बचती क्यों हैं ??दिल्ली ब्लॉगर सम्मेलनों में तो कई बार मुझे संजू भाभी जी , ( भाई राजीव तनेजा जी नाम के ब्लॉग की मॉडरेटर और उनकी श्रीमती जी ) की मौन डांट पड चुकी है कि अच्छा .....अकेले मैं ही ...श्रीमती झा जी कहां हैं ? अब मैं उन्हें क्या बताऊं कि , वो तो हमने राजीव भाई को पटा रखा है आपकी लंबी लंबी कहानी हम तभी पूरी पढेंगे जब आप भाभी जी को ले कर आओगी ताकि भूले भटके यदि और भी कोई सहब्लॉगर आ जाएं तो फ़िर महिला महिला मोर्चा तो बन ही जाएगा ।हालांकि मैं ये बिल्कुल भी नहीं कह रहा कि महिला ब्लॉगर्स की उपस्थिति के लिए एक अन्य या बहुत सारी महिला ब्लॉगर्स का होना जरूरी है बल्कि कोई जरूरी नहीं है । तो बताईये जी आप सब के सब ....क्या कारण है जी ..और हां बहाने वाले औप्शन नहीं चलेंगे ..हमने उन्हें पहले ही अलग करके छांट दिया है आप लिखेंगे तो भी ब्लॉगर बाबा भी उसे स्वीकार नहीं करेंगे और आपकी टिप्पणी कौन बनेगा करोडपति में चली जाएगी .....फ़िर मुझे मत कहिएगा यदि कल को ..अपने हायं बाबू ..ओहो ..अमिताभ बच्चन जी .उसे पढ डालें ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

