रविवार, 24 अक्तूबर 2010

कुछ अजब गजब के नियम ..और झाजी की बकबक ..हमारा एक ठो नयका ब्लॉग





कतार का नियम


हमेशा वो कतार तेज खिसकने लगती है जिसे आपने ये सबसे धीमा कतार समझ के अभी अभी छोडा है


मैकेनिक्स का नियम


जब भी आपके दोनों हाथ ग्रीस से सने होते हैं , ठीक तभी आपकी नाक के नीचे खुजली होती है


पहुंच का नियम


नीचे गिरने वाला सिक्का हमेशा ,उस कोने में जाकर बैठ जाता है , जहां पर आपकी पहुंच सबसे कठिन होती है



मिलने का नियम

इस बात की संभावना सबसे अधिक होती है कि वो व्यक्ति आपको तभी मिल सकता है , जो कि आप नहीं चाहते कि मिले और देखे कि आप किसके साथ हैं




टेलिफ़ोन का नियम


हमेशा ही इस बात की प्रबल संभावना होती है कि , रॉंग नंबर कभी इंगेज नहीं मिलता


चलिए आज एतने बकबका लेते हैं ..बकिया कल से रोजे एक डोज़ ..का ठीक रहेगा नू

28 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा बहुत बढिया झा जी।
    एक बात और जब बाथरुम में होता हूँ तभी फ़ोन की घंटी क्यों बजती है?

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  2. वाह क्या बात है............

    बहुत ख़ूब !

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  3. यही सारे नियमों में बंधे जिन्दगी जिये जा रहे हैं..मर्फी के नियम!!

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  4. मजेदार हैं ये नियम...
    नए ब्लॉग की बधाई

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  5. नए ब्लॉग की बधाई .

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    www.vyangya.blog.co.in
    http://vyangyalok.blogspot.com
    व्यंग्य और व्यंग्यलोक
    On Facebook

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  6. अजय भाई, लगे रहिये .......बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

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  7. हा हा हा हा हा हा हा

    बहुत प्रक्टिकल बात कही है

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  8. sabbe baat badi sachchi wali kahi aapne.........bahute dikat hota hai jab sikka niche palang ke niche gire aur fir kisi aise kone me pahuch jaye, jis se pata hi na chale.........:D

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  9. Awesome !. Saw this in Indli,and couldnt resist comming here

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  10. अजय जी ये तो काम की बक-बक है इसे तो खुशी-खुशी झेला जा सकता है ...

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  11. झा'ज़ लॉ का सचित्र बिबरन पढने के बाद बुझा गया एगो अलगे कॉपी बनाना पड़ेगा,ई पढाई करने के लिए.. काह कि सब का सब बतवे नोटनीय है!! बधाई!!

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  12. यह नियम तो न्यूटन के नियमो को भी पीछे छोड गये .सभी कमाल है

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  13. .
    बकबकोलॉज़ी के जनक अजय झा बकलोल की जय हो ।

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  14. वैसे जब आप ड्राइविंग कर रहे हो तब भी अक्सर मोबाईल बजने लगता है | मजेदार है |

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  15. इ तो बहुतै बढ़िया बा /
    झा साहेब को बडका आभार /

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  16. bhaiya jha ji naye blog ki badhai aur shubhkamnayein to aap le lo koi wanda nai lekin ek sawal jo man me aaya ki kitne?
    idhar to mamu apan ek hi blog dhang se daily handle nai kar pa rahein aur aap ke sath aur bhi kai bahadur logo ko dekhta hun jo das-das blog bana ke chalte hain.... bhaiya raaj ham ko bhi bataa do.... ki 24 ghante me se daftar ki naukari fir ghar pariwar yar dost ke bad itna samay kaise mil jata hai ki 10-10 blog handle kar lete hain... ye gur mujhe bhi de do prabhu...... permanent shishya banunga mai aapka ;) ...

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  17. डॉ अमर कुमार के सत्य वचन को मेरा शत प्रतिशत समर्थन...

    जय हिंद...

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  18. अमां केसी बात पूछ रहे हो संजीत भाई ...अभी तो चार और पडे हैं , किताबों का कोना , ब्लॉगमेला , मंदाकिनी ( एक उपन्यास ) इन पर भी जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा । यार इत्ते के बाद कम से कम डेढ दो सौ ब्लॉग्स को पढना और टीपना भी ..........बताओ फ़िर भी हमें कोई जेनरल का रिजवेसन भी करवा करे ,,,,अरे रिजवेसन छोडिए महाराज ...ओईसे भी नहीं बुलाता ...शायद यही सोचता होगा छोडो यार पच्चीस तीस और बना लेने दो फ़िर देखते हैं ..हमरे दूसरे बहादुर साथी लोग भी साईत यही सोच रहे हों ...

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  19. बहुत बढिया .. अगली बार ऐसे नियम लिखते वक्‍त उसमें मांग का नियम भी जोड दें .. जो मैने अर्थशास्‍त्र में पढा है .. मांगों उसी से, जो दे दे खुशी से, कहे ना किसी से!!

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  20. सजीत को बहुत अच्छा जवाब दिया है आपने
    aस्मझ जायें तो और भी अच्छा

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  21. प्यारा लिखा है आपने....
    प्रतीक्षारत........

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  22. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  23. शानदार प्रयास बधाई और शुभकामनाएँ।

    एक विचार : चाहे कोई माने या न माने, लेकिन हमारे विचार हर अच्छे और बुरे, प्रिय और अप्रिय के प्राथमिक कारण हैं!

    -लेखक (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश') : समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान- (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जिसमें 05 अक्टूबर, 2010 तक, 4542 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता राजस्थान के सभी जिलों एवं दिल्ली सहित देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। फोन नं. 0141-2222225 (सायं 7 से 8 बजे), मो. नं. 098285-02666.
    E-mail : dplmeena@gmail.com
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